क्या योगी सरकार में खत्म हो जाएगा कानपुर से बिठूर के एतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा मेले का अस्तित्व?

भाजपा के वर्तमान बिठूर विधानसभा से विधायक अभिजीत सिंह सांगा व उनकी चेयरमैन मां पर अस्तित्व समाप्त करने वालों को संरक्षण देने का आरोप

जन एक्सप्रेस से कमलेश फाइटर व सनी राव मोघे की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली/ कानपुर नगर!
ऐसा लगता है कि अब बिठूर का इतिहास शनै: शनैः खत्म होने कि ओर है क्योंकि हजारों वर्ष पुराना कार्तिक पूर्णिमा का मेला जो इतिहास में दर्ज है उसका अस्तित्व इस वर्ष समाप्त हो सकता है कारण यह है कि जिस स्थान पर कार्तिक पूर्णिमा का मेला आयोजित किया जाता था अब उस जमीन पर मालिकाना हक जताने के साथ ही एक व्यक्ति द्वारा बाउंड्री वॉल बनवा कर अपने कब्जे में लेने का कार्य किया जा रहा है! हालांकि इस व्यक्ति का दावा यह है कि जिस भूमि पर अवैध कब्जा कर रहा है वह भूमि उसकी है, लेकिन वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों का यह कहना है कि यह कब्जा उसके द्वारा वैधानिक रूप से नहीं किया जा रहा है क्षेत्रीय विधायक व उनकी चेयरमैन मां की इसमें भूमिका संदिग्ध है! असलियत कुछ भी हो परंतु हजारों वर्ष का कार्तिक पूर्णिमा मेले का इतिहास दफन होने की ओर है, ऐसे समय में भगवान राम के अस्तित्व की लड़ाई लड़ने वाली और उन्हीं के नाम पर वोट बैंक की राजनीति कर केंद्र व प्रदेश में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी कुछ भी न कर पाते हुए दिखाई दे रही है! पुरातत्व विभाग भी इस मामले में गहरी नींद में सोया हुआ है!

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में हजारों वर्षों से इतिहास के पन्ने में दर्ज बिठूर के कार्तिक मेले का अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ने के लिए क्षेत्रीय बुजुर्गों ने कमान संभाल ली है! श्रीनाथ द्विवेदी पुत्र श्री त्रिभुवन नाथ द्विवेदी निवासी ध्रुव नगर कस्बा थाना बिठूर कानपुर नगर द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन बिठूर का ऐतिहासिक मेला लगता है और इस मेले का आयोजन आराजी संख्या 202 व 207 की खाली पड़ी भूमि पर हजारों वर्षों से होता चला आ रहा है! लेकिन इस वर्ष जिस भूमि पर मेले का आयोजन होता है उस भूमि पर विमल दीक्षित नामक व्यक्ति द्वारा खुद की संपत्ति बता कर अपने कब्जे में भूमि को लेकर बाउंड्री वॉल कराने का कार्य आरंभ हो चुका है! जिसके संबंध दिनांक 31 अक्टूबर को नगर पंचायत अधिकारी को शिकायती पत्र देने गए ग्रामीणों व श्री दिवेदी के साथ चेयरमैन साहिबा जो वर्तमान भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा की मां है उनके द्वारा अभद्रता कर धक्के देकर अपमानित करने का मामला अंजाम दिया गया! श्री द्विवेदी द्वारा यह भी बताया गया कि विधायक अभिजीत सिंह सांगा की मां के विरुद्ध बिठूर थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी लेकिन सत्ता पक्ष का मामला होने के कारण अभियोग पंजीकृत नहीं किया गया है इसके साथ ही श्री द्विवेदी द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्तमान भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा व उनकी मां का इस मेले के अस्तित्व को समाप्त करने में संपूर्ण संरक्षण विमल दीक्षित को प्राप्त है! इस मामले में भाजपा विधायक अभिजित सिंह सांगा का भी पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन काट दिया गया

क्या योगी सरकार में खत्म हो जाएगा कानपुर से बिठूर के एतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा मेले का अस्तित्व?

साक्ष्यों के अनुसार यह मेला चंदेल शासक परिमर्दिदेव (११६५-१२०२) के समय आरम्भ हुआ था, जो आज तक लगता आ रहा है। कालांतर में मदनवर्मन के समय एक पद्मावती नामक नर्तकी के नृत्य कार्यक्रमों का उल्लेख भी कालिंजर के इतिहास में मिलता है। उसका नृत्य उस समय महोत्सव का मुख्य आकर्षण हुआ करता था! कार्तिक पूर्णिमा के दिन बिठूर में गंगा नदी के किनारे लगने वाला कार्तिक यानी कतकी मेला प्राचीन काल से ही पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। कानपुर शहर से 15 किलोमीटर दूर गंगा तट पर स्थित बिठूर वैसे तो हर साल धार्मिक लिहाज से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां बड़ा मेला लगता है। यहां तीन दिन तक चलने वाले मेले में ही नौलखा हार की जंग शुरू हुई थी, जो आगे चलकर महोबा के चंदेल वंश के बीच छिड़ी ऐतिहासिक लड़ाई की मूक गवाह बनी।

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