हिंसक जानवर ने नील गाय के बच्चे को किया घायल सूचना पर पहुंचे वन कर्मी

जन एक्सप्रेस संवाददाता

मिल्कीपुर/ अयोध्या। कुमारगंज वन रेन्ज में हिसंक  जानवर की आमद होने के बाद से वन कर्मियों द्वारा गांव से सटे जंगलों में कांबिंग की जा रही  है, इसके साथ- साथ हिसंक जानवर को पकड़ने के लिए अमावा छिटन गांंव से सटे जंगल में पिंजड़े को लगाया गया है लेकिन  जानवर की कोई सटीक लोकेशन वन कर्मियों को नहीं मिल पा रही है।तीन दिन पूर्व आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के हिरणावती छात्रावास में हिंसक जानवर ने हिरन को निवाला बनाया था सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पद चिन्हों को देखने के बाद बताया कि फिशिंग कैट के पद चिन्ह है। जंगलों से सटे गांवों में रात होते ही शोर शराबा तेंदुए को लेकर होने लगता है सूचना पर जब वन विभाग की टीम पहुंची है तो कहीं पर कोई भी पद चिन्ह वन कर्मियों को नहीं मिलता। जबकि जंगल से सटे गांव में हिंसक जानवर की निगरानी के लिए वन कर्मियों को लगाया गया है वन कर्मियों को तो हिंसक जानवर नहीं दिखाई पड़ रहा लेकिन ग्रामीण प्रतिदिन हिंसक जानवर को लेकर गुहार लगाते रहते हैं । बुधवार दोपहर क्षेत्रीय वन अधिकारी कुमारगंज अशोक कुमार श्रीवास्तव को सूचना मिली कि सौ शैय्या अस्पताल के पीछे जंगल से सटे धान के खेत में हिंसक जानवर नील गाय के बच्चे का शिकार कर रहा है जानकारी मिलते ही आनन-फानन में वन कर्मी मौके पर पहुंच कर देखे तो नील गाय का बच्चा घायल अवस्था में पड़ा हुआ था। कोई भी जंगली जानवर  नील गाय के बच्चे के इर्द-गिर्द काफी दूर तक  नहीं दिखाई पड़ रहा था  इसके चलते वन कर्मियों ने  घायल नीलगाय के बच्चे को कृषि विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सालय ले जाया गया जहां पर इलाज चल रहा है ।इस संबंध में जब क्षेत्रीय वन अधिकारी से जानकारी चाही गई तो उन्होंने ने बताया कि हो सकता है नील गाय के बच्चे को सियार ने खदेड़ा हो जिसके चलते तार में फंसकर गिर गया हो फिलहाल जंगल में वन कर्मियों द्वारा कांबिंग की गई लेकिन कहीं पर कोई पदचिन्ह नहीं मिले।वहीं दूसरी ओर मरूई गणेशपुर ग्राम प्रधान द्वारा वन कर्मियों को सूचना दी गई कि गांव से सटे खेत के पास बिल्ली जैसी देखने वाले हिंसक जानवर का बच्चा घूम रहा है जानकारी मिलते ही वन विभाग के दीपक शुक्ला मौके पर पहुंचकर जंगली जानवर के बच्चे को वन रेंज कार्यालय कुमारगंज ले आए लेकिन बच्चे की पहचान नहीं हो पाई है फिलहाल वन कर्मियों द्वारा बच्चे को दूध भी पिलाया जा रहा है।

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