रेलवे चाइल्डलाइन ने कुपोषण व कोविड -19 से बचाव की दी जानकारी

जन एक्सप्रेस संवाददाता
कानपुर नगर।
पोषण अभियान को राष्ट्रीय पोषण मिशन भी कहा जाता है जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करने के लिए भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है। जिस क्रम में शनिवार को रेलवे चाइल्डलाइन कानपुर ने कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन पर महिलाओं व बच्चों के बीच पोषण माह के अंर्तगत रेलवे चाइल्डलाइन ने कुपोषण व कोविड -19 से बचाव की जानकारी देकर जनसामान्य को जागरूक किया।
जिसके साथ ही जनसामान्य से अपील कि कि अगर उनके संज्ञान में ऐसा कोई ऐसा बच्चा जो कि कुपोषण का शिकार है आता है तो चाइल्डलाइन को अवगत करा सकते हैं! उस बच्चे की त्वरित रूप से मदद कराई जाएगी। कार्यक्रम का आरम्भ सव्र्रपथम बच्चों को मास्क वितरित करके किया। रेलवे चाइल्डलाइन कानपुर के समन्वयक गौरव सचान ने जन सामान्य व उपस्थित आशा बहुओं को बताया कि पोषण-माह के प्रति जागरूक करते हुए किया जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि कुपोषण को दूर करने के लिए एक बहु-मंत्रालय अभिसरण मिशन है। यह पोषण के तहत जन्म के समय कम वजन और एनीमिया स्टंटिंग को कम करने की इच्छा रखता है। साथ ही उन्होने बताया कि सितंबर का महीना देशभर में राष्ट्रीय पोषणमाह (राष्ट्र पोषण-माह) के रूप में मनाया जाता है, जो पोषण अभियान के तहत जन आंदोलन का हिस्सा है।
चाइल्डलाइन के निदेशक कमलकान्त तिवारी ने कुपोषण और भुखमरी में अंतर समझाते हुए बताया कि कुपोषण कई रूपों में आता है। सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब है खराब पोषण। साथ ही उन्होने बताया कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तब होती है जब किसी व्यक्ति को अपने आहार में पर्याप्त महत्वपूर्ण विटामिन और खनिज नहीं मिलते हैं। सूक्ष्म पोषकतत्वों की कमी से स्वास्थ्य और विकास खराब हो सकता है, खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में। जिसके साथ ही भुखमरी भोजन की गंभीर कमी है जिसके परिणाम स्वरूप मृत्यु हो सकती है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से चाइल्डलाइन कानपुर के समन्वयक गौरव सचान, काउंसलर मंजु लता दुबे, रीता सचान, संगीता सचान, उमाशंकर, प्रदीप पाठक, अमिता तिवारी, अनामिका मिश्रा दिनेश सिंह, नारायण दत्त तिवारी 03 आशा बहु सहित 20 से अधिक लोग उपस्थित रहे।

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