बृहद जन जागरूकता अभियान आयोजित, समाज में महिलाओं की भागीदारी के प्रति लोगों को किया गया जागरूक

तुलसीपुर/ बलरामपुर शनिवार को ग्राम पंचायत बगाही, पैगापुर एवं रघवापुर ग्राम पंचायत में तराई एन्वायरमेंट अवेयरनेस समिति बलरामपुर में यूरोपियन यूनियन एवं चाइल्डफंड के साझा प्रयास से बृहद जन जागरूकता अभियान आयोजन का बैठक किया गया । जिसमें परियोजना के उद्देश महिला किसान को लेकर चर्चा की गई आलोक जी ने बताया कि हमारे कृषि क्षेत्र में महिलाएं सबसे ज्यादा काम करती हैं लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पा रही हैं ना उन्हें शाबाशी प्रदान होती है ना पुरस्कार गांव की महिलाएं बाहर नहीं निकलना चाहती आज सामाजिक दृष्टिकोण को देखते हुए महिलाएं भी आगे आ रही हैं और वह ग्राम स्तर पर कार्यरत हैं चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में हो या चिकित्सा के क्षेत्र में हो या अन्य महिला स्वतंत्र रूप से अपने कार्य को कर सकती हैं जितना अधिकार एक पुरुष वर्ग को है उतना ही अधिकार महिला वर्ग को कानून द्वारा दिया गया प्राय: देखा गया है कि  महिलाओं को केवल घर तक ही सीमित रहना पड़ता है भारत सरकार द्वारा महिलाओं को लगभग ६० पर्सेंट सरकारी योजनाओं की श्रेणी में रखा गया है। भारत सरकार द्वारा चल रही योजनाएं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कन्या सुमंगला योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जननी सुरक्षा योजना आयुष्मान भारत योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना आज बहुत सारी योजनाएं महिलाओं से जुड़ी हुई हैं जरूरत है तो जागरूकता की और शिक्षा की हमें अपने लड़कियों को विद्यालय में पढ़ाना चाहिए क्योंकि समाज में वह भी  आगे बढ़े और समाज  और गांव में स्तर पर उनकी एक पहचान बने। जागरूकता अभियान बैठक के तहत  विष्णु कुमार श्रीवास्तव बताया गया कि  महिलाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए स्वयं प्रयास करने होंगे हीन भावना को दूर करके अपने में हिम्मत और आत्मविश्वास को जगाना होगा अपने में यह विश्वास जगाना होगा कि हमारा भी अस्तित्व है उन्हें अपने पर सकारात्मक सोच विकसित कर सकती हैं । तभी वह दूसरे से सम्मान प्राप्त होगा। हमारे आत्मविश्वास को धारण करना होगा सरकार ने भी महिलाओं की पहचान को मजबूत बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जैसे स्कूल में बच्चों के अभिभावक के रूप में पिता के साथ-साथ माता का नाम लिखना जरूरी है ऐसा सरकारी आदेश भी है और लगभग सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में इस नियम को लागू किया जा रहा है ।सरकारी आदेशानुसार जमीन व मकान खरीदने व बेचने में कागजात तक पति और पत्नी दोनों की रजामंदी जरूरी है।      पैतृक संपत्ति में बेटे के साथ-साथ बेटी को भी समान अधिकार है । महिलाओं के महत्व को पढ़ाने के लिए सरकार ने नियम तो बना दिए परंतु इन को लागू करने के लिए घर परिवार में पुरुष महिलाओं सभी का सहयोग करना होगा तभी महिलाओं की पहचान बन सकेगी । आने वाले कल के लिए हमें अपनी बेटियों बहू को वह अवसर देने होंगे जो हमें नहीं मिल पाए हैं । हम सबको मिलकर समाज में महिलाओं के महत्व को स्थापित करने के लिए स्वयं तथा अपने घर परिवार से शुरुआत करनी होगी। महिलाएं घर के सदस्य के देखरेख बच्चों का पालन पोषण में भोजन की व्यवस्था करते हैं वह भी  परिवार का सृजन करती है उसकी देखभाल करती है। सामाजिक व्यवस्था के तहत काम का बंटवारा परिवार को सांत्वना देने के लिए बनाया गया था परंतु इसमें दोनों के काम बराबर महत्व है ।आजकल सामाजिक व्यवस्थाओं में बदलाव आ रहा है महिलाएं भी बाहर काम करने लगी है वह भी घर का आमदनी में सहयोग करते हैं। पोषण की बात करें तो पुरुषों की तुलना में महिलाओं की मृत्यु अधिकतर जन्म के समय से लेकर 29 वर्ष की आयु के बीच में हो जाती जिसका मुख्य कारण लड़कियों की परवरिश में पोषण की कमी महावारी के दौरान पौष्टिक भोजन तथा सही देखभाल की कमी सबसे अधिक गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की मृत्यु होती भारत में मातृ मृत्यु दर 178 तथा उत्तर प्रदेश का 292 यह 2011 के जनगणना के अनुसार है।शिक्षा की बात करें तो 2011 के जनगणना के अनुसार पुरुष साक्षरता 82% जबकि भारतीय महिलाओं की साक्षरता 65% है साक्षरता दर में भी कमी है और उस कमी को दूर किया जा सकता है।अगर हम सोचे तो कुछ बदलाव कर सकते हैं और  यह जरूरी है ऐसे लड़की और लड़कों दोनों को समान शिक्षा दें दोनों की शिक्षा को बराबर का मौका दें। लड़की और लड़के दोनों को स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार है दोनों को समान रूप से पोषण देखभाल  सुविधाएं दे महिला को भी आने-जाने के अवसर मिलने चाहिए।घर परिवार में सभी मुद्दों पर पति-पत्नी मिलकर निर्णय लें। लड़की हो या लड़का दोनों को समान शिक्षा स्वास्थ्य क्षमता और ममता दी जाए तो दोनों में समान क्षमता योग  विकसित हो सकती हैं।तत्पश्चात बदलते मौसम जलवायु परिवर्तन के बारे में उनको बताया गया कि वह अपने कृषि क्षेत्र में जैविक खाद का इस्तेमाल करें और इसका प्रशिक्षण भी लें जिससे उनके फसल के उत्पादन में वृद्धि हो। परियोजना 15 ग्राम पंचायत में 1500  महिला किसान के साथ काम कर रही है। परियोजना 3 वर्षों तक ग्राम स्तर पर काम करेगी जिसमें महिला सशक्तिकरण के जरिए महिलाओं को खेती-किसानी के लिए तकनीकी सहायता सरकार द्वारा क्या प्राप्त हो सकती है इसके बारे में उनको अवगत कराया जाएगा तकनीकी सहायता से वह अपने पति को कैसे और अच्छे तरीके से कर सकती हैं उनके अजीब काम में कैसे वृद्धि हो सकती है इस बारे में नहीं बताया गया।  ग्राम पंचायत से मिलकर चल रही ग्राम पंचायत सरकारी योजनाओं को पहुंचाना है ,परियोजना का एक मुख्य लक्ष्य किसान उत्पादन संगठन से जोड़ने का है जिसके तहत महिलाओं के आमदनी में बढ़ावा मिलेगा महिला किसान क्यों नए-नए गुढ सीखेंगे उन्हें एक  उदम किसान के रूप में पहचान बनेगी। कार्यक्रम में दिव्य प्रकाश तिवारी चमन तथा बगाही ग्राम पंचायत के भूतपूर्व प्रधान अनारकली वर्तमान में पंचायत सदस्य ,  किसान  जोगमाया कृष्णावती शारदा देवी मीरा चैतू सहज राम विजय कुमार आदि किसान    संस्था के विष्णु कुमार श्रीवास्तव पुरुषोत्तम जी आलोक जी राधिका, पल्लवी जी उपस्थित रहे।

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