परिवार नियोजन कार्यक्रम से युवा वर्ग को जोड़ेने के निर्देश

उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में चलेगा परिवार नियोजन कार्यक्रम

बलरामपुर । प्रदेश में अब परिवार नियोजन कार्यक्रम को मिशन मोड़ में चलाने की तैयारी हो रही है। इससे जहां शिशु व मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी, वहीं घर-घर बेहतर स्वास्थ्य के आयाम मिल सकेंगे। विभागीय अधिकारी प्रदेश के युवा दंपति को परिवार नियोजन कार्यक्रम से जोड़ें। सरकार ने सभी लाभार्थियों के लिए गर्भनिरोधक सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी किया है। राज्य ने उन सभी प्रवासियों के लिए आजीविका और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार भी सुनिश्चित किया है जो कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान इस राज्य में वापस लौटकर आए हैं।
                  विश्व गर्भ निरोधक दिवस पर यह जानकारी प्रदेश के स्वास्थ मंत्री जय प्रकाश सिंह ने एक वेबिनार के दौरान कही। यह वर्चुअल संवाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिल एंड मिलेंडा गेट्स फाउंडेशन की सहयोगी संस्था ममता एचएमआईएस के सहयोग से प्रदेश स्तर पर आयोजित की गई थी। मंत्री ने कहा कि फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ता ग्रामीणों के लिए अल्पकालीन गर्भनिरोधक विधियों के संबंध में परिवार नियोजन सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं। हमें उसकी सराहना करनी चाहिए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए आईएएस अधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि हमें कोविड-19 की वजह से परिवार नियोजन के फायदों से वंचित नहीं होना चाहिए। बच्चों के जन्म में अंतर रखने की अस्थायी गर्भनिरोधक विधियों पर ध्यान देते हुए सभी प्रणालियों को फिर से सक्रिय करना है। एनएचएम एमडी अपर्णा उपाध्याय ने परिवार नियोजन को मिशन मोड पर लाने के बारे में समझाया। उन्होने बताया कि परिवार नियोजन को मिशन मोड पर लाने के बाद ऊपर से नीचे तक सब मिलकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे। उन्होने बताया कि हमारी एमसीपीआर दर आदर्श रूप से 52 प्रतिशत होनी चाहिए। यह लंबे समय से 31 प्रतिशत ही है। हमें इसे मिशन मोड में बढ़ाना चाहिए। कुछ जिलों में यह दर ज्यादा है और कुछ जिलों में यह कम है। डॉ. राकेश दुबे, महानिदेशक, परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि कम उम्र के दंपतियों की शादी जल्दी हो जाती है और उन्हें परिवार नियोजन के बारे में ज्यादा नहीं मालूम होता है। इस वजह से सरकार इन कम उम्र के लोगों को समुदाय के अनुकूल विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा लक्षित कर रही है। बीएमजीएफ के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. देवेंद्र खंडैत ने कहा कि परिवार नियोजन विधि को समुदाय तक पहुंचाना अगला महत्वपूर्ण कदम है। परिवार नियोजन और बच्चों के जन्म में अंतर रखने की गर्भ निरोधक विधि को एक में शामिल करना राज्य की और हमारी साझा प्राथमिकता है। बीएमजीएफ के फैमिली प्लानिंग पॉलिसी की कंट्री लीड मेधा गांधी ने कहा कि कम उम्र के दम्पतियों को जानकारी देकर व परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने के लिए प्रदेश सरकार को वे बधाई देतीं हैं। कार्यक्रम को पॉप कौंसिल के कंट्री डायरेक्टर डॉ. निरंजन सगुरती व ममता एचआईएमसी के इग्जेक्यटिव डायरेक्टर डॉ. सुनील मेहरा ने भी सम्बोधित किया। इस वर्चुअल आयोजन के लिए सभी ने यूपीटीएसयू, सीफार और पीएसआई संस्था को धन्यवाद दिया। वर्चुअल संवाद के दौरान जिले से जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार मिश्रा व स्वास्थ शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।
इन मुद्दों पर हुई चर्चा 
परिवार नियोजन, बच्चों के जन्म में अंतर रखने की गर्भनिरोधक विधियों और नई गर्भनिरोधक विधियों पर जोर देना। प्रदान की जा रही परिवार नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता को परिलक्षित करने के लिए मॉनीटरिंग और समीक्षा कार्यप्रणाली। कम उम्र के और कम बच्चे वाले दंपतियों के लिए परिवार नियोजन सेवाओं के बजटीय आवंटन पर फोकस करना।

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