प्रधानी से लेकर जिलापंचायत तक था विकास का वर्चस्व, इशारे पर बनते थे जनप्रतिनिधि

जन एक्सप्रेस से शमीम फारूकी व उत्तम अग्निहोत्री की विशेष रिपोर्ट
बिल्हौर।
क्षेत्राधिकारी बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा शिवराजपुर थानाध्यक्ष महेश यादव सहित आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य अभियुक्त विकास दुबे को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान मार दिया। बिकरु सहित शिवली, शिवराजपुर व चौबेपुर ब्लाक से दहशत भले ही खत्म हो गयी हो पर भविष्य में कोई विकास दुबे नहीं होगा ये स्थानीय प्रशासन व सफेदपोशो पर निर्भर करेगा।विकास दुबे ने “मै विकास दुबे कानपुर वाला हु”का खिताब यू ही नहीं पाया ब्राम्हण बाहुल्य क्षेत्र कहे जाने वाले बिकरु ग्राम सभा से ही विकास ने राजनीति में कदम रखा था 1954 से 1975 तक बिकरु ग्राम सभा मे अटल बिहारी पांडेय का दबदबा था। सौम्य व सरल स्वभाव के अटल बिहारी पांडेय ने दो दशक तक इस ग्राम सभा का प्रतिनिधित्व किया उनके उपरांत लालाराम एक दशक तक इस ग्राम सभा के प्रधान रहे।आजादी के बाद पहली बार इस ग्राम सभा की बागडोर पिछड़े वर्ग से आने वाले अमरजीत यादव के हाथ आ गयी। 85 से 95 तक ग्राम सभा का प्रतिनिधित्व किया तत्पश्चात राजनीति में विकास दुबे ने पदार्पण किया और 1995 के ग्रामसभा चुनाव में उसने दावेदारी ठोक दी गाँव सभा मे अपनी मजबूत पकड़ बना चुके विकास को जीत हासिल हुयी और व प्रधान बन गया 1995 में ग्राम सभा प्रधान बने विकास ने अपनी राजनीतिक पकड़ इस कदर मजबूत की कि वह बाहुबली बन बैठा 2000 के आम चुनाव में अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित हुयी सीट पर विकास दुबे ने अपने नौकर की पत्नी को प्रधान बना लिया सन 2000 के दशक में संतोष शुक्ला दर्जा प्राप्त मंत्री की हत्या से सुर्खियों में आया विकास आस पास की ग्राम सभाओं व शिवराजपुर चौबेपुर ब्लाक में अपना दबदबा या यूं कहें दहशत कायम कर चुका था। इसलिये विकास ने जेल में रहते हुये ही घिमऊ जिलापंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की वहीं 2005 के ग्राम सभा चुनाव में अपने छोटे भाई दीपप्रकाश दुबे की पत्नी अंजली दुबे को उसने बिकरु से प्रधान बनवा दिया 2010 में फिर से पिछड़े वर्ग से रजनीकान्त कुशवाहा ने जीत हासिल की परंतु चुनाव जीतने के एक वर्ष बाद वो ग्राम छोडक़र कहीं चले गये जिसके पीछे शायद विकास दुबे की दहशत ही थी ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई जिसके चलते ग्राम सभा मे विकास कार्यो हेतु त्रिसदस्यीय कमेटी बना दी गयी जिसकी अध्यक्ष विसुना देवी पत्नी रामभरोसे ने किया जो पहले भी 2005 तक विकास की कृपा से प्रधान रह चुकी थी दबी जुबान में रजनीकांत कुशवाहा के गाँव छोडऩे की वजह ग्रामीण विकास की दहशत को ही मानते हैं।2015 के प्रधानी चुनाव में पुन: अंजली दुबे ने जीत हासिल की जो अभी तक काबिज हैं।
वहीं विकास दुबे का साम्राज्य बिकरु तक ही नहीं रहा आसपास के लगभग आधा दर्जन ग्राम सभाओं में प्रधान उसकी मर्जी से ही बनते थे वहीं वर्तमान के कुछ ब्लाक सभी विकास की कृपा से से बन सके विकास की कृपादृष्टि मुख्य मानक था 2015 के जिलापंचायत चुनाव में विकास चुनाव नहीं लडऩा चाहता था पर सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन बिल्हौर से विधायक व महिला मंत्री से जिलापंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का वादा मिलने के कारण विकास ने आखिरी समय में अपनी पत्नी का नामांकन कराया परंतु जानकारी के अनुसार जिलापंचायत अध्यक्ष के चुनाव के समय आपराधिक इतिहास होने के चलते आलाकमान ने विकास को टिकट देने से मना कर पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष रहे गुड्डन कटियार की भाभी को टिकट दे दिया हालांकि सूत्र बताते हैं कि नाराज विकास अपनी पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ाना चाहता था परंतु कुछ सफेदपोश नेताव ने मद्धयस्तता करके इसे सुलझा दिया था बिकरु सहित आसपास ग्राम सभाओं मे फैसले थाने या कचेहरी में नहीं अपितु विकास दुबे(पंडित ) के दरबार मे ही होते थे मे ही होते थे।

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