36% ब्याज का दबाव नहीं सह सका किसान, आत्महत्या कर दे दी जान

फाइनेंस के लोन से परेशान होकर 29 वर्षीय किसान ने की आत्महत्या 

जन एक्सप्रेस / अनुज हनुमत

चित्रकूट। एक तरफ कोरोना महामारी से आमजन त्रस्त है तो वही इसके कारण सरकारें भी आम लोगो को हर तरह की मदद देने में लगी है । वही दूसरी तरफ निजी फाइनेंस कंपनियां किसानों के लिए काल बनकर सामने आ रही हैं । ऐसा ही एक मामला सामने आया है मानिकपुर विकासखण्ड के सेमरदहा गांव का। सेमरदहा ग्राम पंचायत में निजी फाइनेंस कंपनी “JOHN DEERE” द्वारा ट्रैक्टर ले जाने से निराश किसान ने फांसी लगाकर की आत्महत्या। जानकारी के अनुसार , ग्राम पंचायत सेमरदहा के रहने वाले किसान योगेश मिश्रा (उम्र 29) साल पुत्र भागवत प्रसाद मिश्रा ने उस समय निराश होकर आत्महत्या कर ली जब निजी कंपनी के द्वारा फाइनेंस ट्रैक्टर की किस्त 4 महीने से ना दिए जाने पर कंपनी द्वारा लगातार किस्त भरने का दबाव दिया जा रहा था। जबकि किसान द्वारा कंपनी के लगाए गए ब्याज को कम करने की लगातार प्रार्थना कर रहा था । जानकारी के अनुसार योगेश घर के मुखिया थे और सारी जिम्मेदारी उनके ही कंधों में थी । अपने छोटे भाई अखिलेश मिश्र के नाम उन्होंने ट्रेक्टर का फाइनेंस करा रखा था । क़िस्त भरने से लेकर उसकी आय व्यय का लेखा जोखा सम्बन्धी सारी जिम्मेदारी किसान योगेश मिश्र के ऊपर थी। कंपनी लगातार उसे ट्रैक्टर वापस करने का दबाव बना रही थी। तभी किसान के छोटे भाई ने सोमवार को ट्रैक्टर कंपनी को ट्रैक्टर वापस कर दिया दिया था। तभी किसान योगेश मिश्रा ने इन सब बातों से निरास होकर अपने खेत पर लगे पीपल के पेड़ से लटक कर अपनी जान दे दी किसान की आत्महत्या कर ली। खबर सुनकर जहां गांव वालों में शोक की लहर दौड़ गई तो वही किसान के परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार उक्त फाइनेंस कंपनी ने 36% वार्षिक ब्याज लगा रखी थी। जिस कारण किसान के ऊपर शुरू से ही दबाव था । फिर कोरोना के कारण जिंदगी ठप्प हो गई । सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि इस कोरोना संकटकाल में भी एक किसान के ऊपर कम्पनी द्वारा इतना दबाव क्यों बनाया गया ? किसान द्वारा की गई इस आत्महत्या के लिए क्या कम्पनी जिम्मेदार नहीं ? देखना होगा कि एक तरफ कोरोना संकट और ऐसे में किसानों के साथ निजी कपंनियों द्वारा बनाये जा रहे दबाव पर प्रशासन क्या कार्यवाही करेगा ! फिलहाल किसान की आत्महत्या ने सिस्टम के सारे दावों की पोल खोलकर रख दी है। 

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