बुंदेलखंड ऑटोमोबाइल प्रा. लि. पर लगा कर्मचारियों का वेतन न देने का आरोप

जन एक्सप्रेस/विजय प्रताप सिंह
महोबा।
देश में 23 मार्च से लॉक डाउन शुरू हुआ था। कोरोना संक्रमण के मद्देनजऱ सरकार और प्रशासन लगातार नियोक्ताओं से अपने कर्मियों को नौकरी से न हटाने की अपील करता चला आ रहा है। लेकिन नफा-नुकसान के आगे सारी अपीलें हवा-हवाई साबित होती नजर आ रही हैं।
कोरोना के दौर में शासन-प्रशासन द्वारा अपने कर्मचारियों को न निकालने की अपील हवा-हवाई साबित होता एक ऐसा ही मामला महोबा जि़ले की नामी गिरामी बुंदेलखंड ऑटोमोबाइल प्रा0 लि0 (महिंद्रा एजेंसी) का है जहां पर सेल्स मैनेजर पद पर कार्य करने वाले राजकुमार पुत्र रामेश्वर ने बताया कि उनके वेतन (पारिश्रमिक) में कटौती किये जाने का विरोध करना भारी पड़ गया। अपने हक़ में कटौती के विरोध के बदले बुंदेलखंड ऑटोमोबाइल प्रा0 लि0 (महिंद्रा एजेंसी) प्रशासन की ओर से सेवाएं समाप्त करने और कानूनी कार्यवाही में फंसाने की धमकी दी गयी थी।
पीडि़त कर्मचारी का आरोप है कि इस मामले में श्रम प्रवर्तन अधिकारी कार्यालय में शिकायत के उपरांत महिन्द्रा प्रशासन के द्वारा मामले की शिकायत वापस लेने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। जब इस मामले में श्रम प्रवर्तन अधिकारी से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि कार्यालय से महिन्द्रा एजेंसी प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए शिकायतकर्ता कर्मचारी के साथ समस्त दस्तावेजों सहित 7 जुलाई 2020 को अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में उपस्थित होकर अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन बुंदेलखंड ऑटोमोबाइल प्रा0 लि0 (महिंद्रा एजेंसी) के पास उपरोक्त विषय से सम्बंधित प्रपत्र न होने के कारण 16 जुलाई को पुन: दस्तावेज लेकर उपस्थित होने की हिदायत दी गई थी लेकिन एजेंसी द्वारा अभी तक कोई भी समाधान योग्य प्रपत्र नहीं प्रदान किये गये हैं। अब मामले की सुनवाई के लिये 23 जुलाई की तारीख नियत की गई है।
वहीं बुंदेलखंड ऑटोमोबाइल प्रा0 लि0 (महिंद्रा एजेंसी) प्रशासन ने मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए पत्राचार के माध्यम से श्रम प्रवर्तन कार्यालय महोबा को अप्रैल तक का भुगतान करने की बात कही है और साथ ही कर्मचारी के पास एक लाख कीमत के सामान रखे होने का आरोप भी लगाया है।

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