सरकारी धान खरीद केंद्रों पर किसानों से आढ़तिये मनमाने दामो खरीद रहे धान

वारदाना न होने का बहाना अधिकांश बन्द है धान खरीद केंद्र  फसल की छीछालेदर से किसान परेशान

जन एक्सप्रेस/डीपी मिश्रा।
पलियाकलां-खीरी।
तहसील इलाका में लगे सरकारी धन खरीद केंद्रो पर मनमाने ढंग से हो रही धन खरीद से किसान खासे परेशान हैं। किसानों ने अक्सर केंद्र बन्द रहने व उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। खरीद केंद्रों पर धन की हो रही छीछालेदर से किसान खासे परेशान होवचले हैं। दीपावली का पर्व करीब होने के कारण किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए खून-पशीना एक कर तैयार की गई धान की फसल को बिचौलियों अथवा आढ़तियों के यहां कम दामों पर बेचने केबलिये बिवश हो गए हैं।क्रय केंद्रों पर हो रही मनमानी को जानते हुए भी जिम्मेदार अफसर मूक बधिर बने हुए हैं।इस सांठगांठ के चलते बिचौलिए किसान से सात सु से लेकर  एक हजार रुपये में धान खरीद रहे हैं। बताया गया  आढ़तिये यही धान खरीद केंद्रों के प्रभारियों से सांठगाठ कर सरकारी दामो पर बेंचकर भारी मुनाफा कमाकर किसानों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं किसानों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सरकारी केंद्रों पर धान खरीद नियमित रूप से शुरू करवाये जाने की मांग की है।उल्लेखनीय है कि पलिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत  थारू इलाका के चंदनचौकी और सूडां क्षेत्र में धान क्रय केंद्रों पर जमकर लापरवाहियां बरती जा रही है। यही नहीं चंदनचौकी और सूडां के क्रय केंद्र पर जमकर किसानों के साथ शोषण किया जा रहा है। जबकि धान तुलवाने के लिए मौजूद किसान ने बताया है कि क्रय केंद्र पर में धान बेचने के लिए करीब 15 दिनों से लाइन में खड़े हुए हैं लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया है।जबकि कुछ दलालों के द्वारा खरीद की जा रही है उसमें सिर्फ 700 व 1000 रुपए के हिसाब से खरीदने के लिए किसानों पर दबाव भी बनाया जाता है‌। लेकिन जिस तरीके से यहां पर खेल खेला जा रहा है उससे लगता नहीं है कि किसानों के धान खरीद के लिए केंद्र प्रभारी कोई कोशिश में लगे हैं।लेकिन जिस तरीके से प्रभारियों के द्वारा खाऊ कमाऊ नीति के कारण किसानों का मनोबल गिरता जा रहा है। उससे कहीं ना कहीं सरकार की छवि को धूमिल करने का भी काम किया जा रहा है।सूत्रों  के अनुसार  कुछ दलालों के माध्यम से खरीद का कार्य किया जा रहा है और धान केंद्रों के कुछ ही दूरी पर दलालों का जमकर डेरा लगा देखा जा सकता है।जबकि कुछ किसानो ने बताया है कि जब धान खरीदने के लिए नंबर आता है तो कहते हैं प्रभारी कि वारदाना खत्म हो गया है की बात कहकर खरीद बन्द कर देते हैं। जबकि यह बारदाना कहां जा रहा है इसके बारे में प्रमुखता से नाम ना छापने के लिए किसान ने बताया कि यह बारदाना सारा रात के अंधेरे में कुछ ही दूरी पर बने प्राइवेट केंद्रों पर पहुंचा दिया जाता है ।जबकि लाइन में खड़े सैकड़ों की तादाद में किसान अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं। लेकिन उनको क्या पता कि यहां केंद्रों पर जो खेल जा रहा है वह किसानों के लिए कितना नुकसान दे साबित हो रहा है यह तो बिचौलिया ही मलाई काट कर मजे लूट रहे हैं।जबकि चंदन चौकी और सूडां केंद्र प्रभारी से जानकारी लेने पर पता चला की धान की खरीदारी इसलिए नहीं की जा रही है कि यहां पर बारदाना नहीं है जबकि प्राइवेट सेक्टरों पर ट्रकों के माध्यम से वारदाने मुहैया कराई जा रही हैं तो कहीं ना कहीं सरकारी केंद्रों पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है।

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