साउथ की नौसिखिया पुलिस का अजब कारनामा

अपहरण: एसपी साउथ व बर्रा कोतवाल की लापरवाही गरीब परिवार पर पड़ गई भारी

जन एक्सप्रेस/कमलेश फाईटर गौरव मिश्रा
कानपुर नगर।
शहर के दक्षिण क्षेत्र में नौसिखिया पुलिसिंग का फैलाया हुआ रायता एसएसपी दिनेश कुमार पी. के लिए बड़ा सिर दर्द साबित होता जा रहा है। इतने लापरवाह पुलिसकर्मी व अधिकारी मानों पूरे प्रदेश से छांटकर कानपुर में लाकर लाद दिए गए हैं। क्या अधिकारी क्या पुलिसकर्मी सभी के सभी सपनों में जीकर काम कर रहे हैं। लेकिन इनकी इस नौसिखिया गिरी से एक गरीब परिवार के 30 लाख रुपए चले गए और उनका किडनैप हुआ बेटा आज तक बरामद नहीं हुआ है। लगभग 24 दिन के बाद भी एसपी साउथ व बर्रा कोतवाल सहित दक्षिण पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं।
अपहरण के इस मामले में बहुत ज्यादा किरकिरी होने पर शहर के एसएसपी दिनेश कुमार पी ने खुद पीडि़त परिवार से मुलाकात की। परिवार ने उन्हें बताया कि थानेदार बर्रा ने 30 लाख रुपये की फिरौती अपने सामने बदमाशों को दिलवाई है और झूठ बोल रहे हैं। इस पर एसएसपी ने थानेदार व टीम में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैैं। एसएसपी ने परिवार को भरोसा दिलाया है कि उनका बेटा जल्द खोज लिया जाएगा। फिरौती की जो भी रकम गई है, उसे भी बरामद कर लिया जाएगा। इसके लिए अलग से क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया है। जांच में जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अपहरण के इस मामले में एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता और थानेदार रणजीत राय की लापरवाही पीडि़तों को भारी पड़ी। सवाल यह है कि जब इतने दिनों से अपहरणकर्ता लगातार पीडि़त परिवार से बात कर रहे थे तो पुलिस कैसे उन तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस का सर्विलांस सेल क्या कर रहा था। सवाल यह भी है कि आखिर पुलिस ने फिरौती की रकम का इंतजाम करने को क्यों कहा? और जरूरी था तो ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की, जिससे अपहर्ताओं को पकड़ा जा सके। स्वजनों के अनुरोध के बावजूद जीपीएस डिवाइस लगाने की सलाह क्यों नहीं मानी गई ? सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि एसपी साउथ कभी भी अपने पुलिसकर्मियों की बुराई सुनना नहीं पसंद करती हैं कहीं यही इनकी यह शैली किडनैप हुए एक गरीब पर भारी तो नहीं पड़ गई।

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